Jul 14, 2026

डिजिटल उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए उत्तराखंड में व्यापक साइबर अपराध सुधारों की घोषणा

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देहरादून। उत्तराखंड में लगातार बढ़ रहे ऑनलाइन फ्रॉड और डिजिटल ठगी के मामलों पर लगाम लगाने के लिए धामी सरकार ने एक बड़ा मास्टरप्लान तैयार किया है। प्रदेश में साइबर अपराधियों के नेटवर्क को ध्वस्त करने और पीड़ितों को तुरंत राहत पहुंचाने के लिए जल्द ही 'स्टेट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर' की स्थापना की जाएगी। सोमवार को सचिवालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने इस सेंटर को शीघ्र अधिसूचित करने और जमीन पर उतारने के कड़े निर्देश दिए हैं।

सचिवालय में गृह सचिव और पुलिस के आला अधिकारियों के साथ हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्य सचिव ने राज्य की साइबर सुरक्षा व्यवस्था की गहन समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस नए कोऑर्डिनेशन सेंटर के बनने से केंद्र, राज्य और जिला स्तर की जांच एजेंसियों के बीच आपसी तालमेल बेहद मजबूत होगा, जिससे देश के किसी भी कोने में बैठे साइबर ठगों को दबोचना आसान हो जाएगा। मुख्य सचिव ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि जानकारी के अभाव में अधिकांश लोग साइबर ठगी का शिकार होने के बाद समय पर शिकायत दर्ज नहीं करा पाते हैं, जिससे उनकी डूबी हुई रकम को फ्रीज कराना मुश्किल हो जाता है। इस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने निम्नलिखित बड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 को और अधिक शक्तिशाली बनाया जाएगा। कॉल रिसीव करने के समय (कॉल रिस्पांस टाइम) को न्यूनतम करने के लिए कॉल सेंटर में पर्याप्त मानव संसाधन (स्टाफ) तैनात किया जाएगा। प्रदेश के सभी मौजूदा साइबर पुलिस थानों को आधुनिक तकनीक और संसाधनों से लैस कर अधिक सशक्त बनाया जाएगा। पुलिस महकमे में साइबर अपराधों से निपटने के लिए पुलिसकर्मियों की क्षमता वृद्धि की जाएगी और 'साइबर कमांडो' की संख्या में भारी इजाफा किया जाएगा। डिजिटल माध्यम से दर्ज होने वाली शिकायतों पर त्वरित कानूनी कार्रवाई के लिए मुख्य सचिव ने 'ई-जीरो एफआईआर' व्यवस्था को बेहद प्रभावी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि ऑनलाइन प्राप्त होने वाली सभी ई-जीरो एफआईआर को शत-प्रतिशत नियमित एफआईआर में बदला जाए। साथ ही, इसका सीसीटीएनएस (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स) के साथ जल्द से जल्द एकीकरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि अपराधी की कुंडली एक क्लिक पर सामने आ सके। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि पुलिस को केवल शिकायत का इंतजार नहीं करना है, बल्कि सक्रिय भूमिका निभाते हुए पीड़ितों की हरसंभव सहायता करनी है। उन्होंने निर्देश दिए कि आम जनता को साइबर ठगी से बचाने और ठगी होने के तुरंत बाद धनराशि वापसी (रिफंड) की व्यवस्था समझाने के लिए मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से राज्यव्यापी जागरूकता अभियान चलाया जाए। बैठक में तय किया गया कि शिकायत निवारण प्रणाली पर जितने भी मामले आएंगे, उनका एक निर्धारित समय सीमा के भीतर निस्तारण करना पुलिस के लिए अनिवार्य होगा। इस उच्चस्तरीय बैठक में गृह सचिव शैलेश बगौली, अपर पुलिस महानिदेशक डॉ. वी. मुरूगेशन, पुलिस महानिरीक्षक डॉ. नीलेश आनंद भरणे, एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह तथा अपर सचिव गृह तृप्ति भट्ट समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिन्हें इन फैसलों को तत्काल लागू करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।